आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Aaina lage hai na jaana lage hai

मेरे अल्फाज़

आना लगे हैं ना जाना लगे है

Nathuram Kaswan

1025 कविताएं

19 Views
ना इनका आना लगे है,
ना उनका जाना लगे है!

उधार की जिंदगी में जैसे,
कर्ज़ कोई चुकाना लगे है!

बनके लाइलाज रह गया,
दर्द बहुत पुराना लगे है!

ठंडी सर्द हवाओं में जैसे,
घावोंका कराहना लगे है!

सांसें बदन से निकलें भी,
उन्हे हवाका लहराना लगेहै!

गलत गैर को ठहराने में,
पागल हुआ जमाना लगे हैं!

अपने मनको मना न पाए,
आसां गैरोंको मनाना लगे है!

जी लगे न लगे बातों में,
उन्हें उसका चाहना लगे हैं!

उसकी सारी बातें उनको,
नया कोई बहाना लगे हैं!

फ़िजूल की इन बातों में,
वक्त यूं ही गंवाना लगे हैं!

है फ़लसफ़ा ये जिंदगी का,
अपना यूंही फ़साना लगे हैं!

एन आर कस्वां


- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Your Story has been saved!