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मेरे अल्फाज़

ह्रदय से ह्रदय का जब आलिंगन होता है

Naresh Kumar

11 कविताएं

516 Views
ह्रदय से ह्रदय का जब आलिंगन होता है ।
तब जाति धर्म का न कोई चिंतन होता है।।
प्यार में होती है जब
सागर जैसी गहराई
भावनाओं मैं होती है
गगन जैसी ऊंचाई ।।
ह्रदयों का एक दूजे के लिए स्पंदन होता है ।
ह्रदय से ह्रदय का जब आलिंगन होता है ।।
प्यार में होती है जब
मोती जैसी सच्चाई
भावनाओं मैं होती है
पावनता की अच्छाई ।।
जग के रिश्तों का न कोई बंधन होता है।
ह्रदय से ह्रदय का जब आलिंगन होता है।।
दो ह्रदयों की दूरी जब
इतनी निकट हो जाती है
एक की धड़कन दूजे को
स्पष्ट सुनाई आती है ।।
घरोंदों की दूरी का न कोई प्रयोजन होता है ।
ह्रदय से ह्रदय का जब आलिंगन होता है ।।

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