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मेरे अल्फाज़

ऐ ज़िन्दगी

Naresh Khurana

3 कविताएं

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बदलूँ और कितना ख़ुद को, तेरे लिए ऐ ज़िन्दगी
मुझमें थोडा सा तो मुझको बाकी रहने दे,
सितम ने तेरे बहुत तड़पाया है मुझे;
बस कर अब आज मुझे सब कहने दे,
करना चाहे तो कर तू भी बेवफ़ाई ;
हमे भी मौत से वफ़ा निभाने दे,
हमारे सीने में भी एक दिल है;
उसे भी खुल कर अब धड़कने दे,
कितना और बदलूँ ख़ुद को, जीने के लिए ऐ ज़िन्दगी;
मुझमें थोडा सा तो मुझको बाकी रहने दे

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