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Khamoshiyon ko todo...

मेरे अल्फाज़

खामोशियों को तोड़ो.....

Naresh Chaudhary

10 कविताएं

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खामोशियों को तोड़ो तो कुछ बात बने
लव जरा खोलो ऐ हमराज़ तो कुछ बात बने

अज़नबी बनकर गुज़रते रहेंगें कबतक हम
अब कोई रिश्ता जोड़ो तो कुछ बात बनें

दूर तक दिख रहा है फैला समन्दर लेक़िन
कोई गर प्यास बुझा दे तो कुछ बात बनें

हौसला पस्त हो चुका है इसी सहरा पर
कोई गुलज़ार दिखा दे तो कुछ बात बनें

आदमी टूटता है तो बस हालात के आगे
'अश्क' अब मुझकों संभालो तो कुछ बात बनें

-नरेश चौधरी'अश्क'
उन्नाव,उ०प्र०

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