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Pathhar dil hi sahi

मेरे अल्फाज़

पत्थर दिल ही सही

Narayan dutt

19 कविताएं

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तू यहीं है

पत्थर दिल ही
मुझे मानो तो सही
जानो तो सही

कठिन होता
लिखना है इस पे
उकेर देना

झनझनाता
है दिल तेरा भी ये
मानो तो सही

मन अशांत
है भीड़ में एकांत
खोज रहा मैं

तूँ यहीं है
मन मे पथ पर
रोज गया मैं

खास हो तुम
आश के विस्वास
की लाज रखो

चखो मंद ही
रस पर प्रेम को
भी याद रखो

ओहो तुमने
जान लिया है क्या
पता दिल का

बावला दिल
भी क्यो कद्र करे
ये क़ातिल का

- नारायण “वासुदेव”
प्रयाग

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