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मेरे अल्फाज़

चाहती हूं...

Namita Gupta

209 कविताएं

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चाहती हूं ..
बचें रहें अब भी कुछ शब्द अनकहे
कि कह सकूं
रोज़.. कुछ नया सा

चाहती हूं..
बचीं रहें अब भी कुछ कविताएं
कि समेंट सकूं
.. कुछ नये अर्थ

चाहती हूं..
बचें रहें मन में कुछ दर्द
कि लिखती रहूं
..कविता ऐसे ही

"मनसी"

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