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मेरे अल्फाज़

आज़ाद हिन्दुस्ताँ

Naghma Siddiqui

8 कविताएं

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सारे चिराग जल उठे, रोशन जहाँ हो गया।
अब गुलामी से आजाद हिन्दोस्ताँ हो गया।
फैली खुश्बू हर तरफ आजाद हिन्दोस्तान की
तस्वीर बदल गई है आज हर इन्सान की।
सत्तर सालों की खुशियाँ आज हम मना रहे,
पर शायद भूल गए क्या-क्या हम गँवा रहे...
भूल गए शहीदों की कुर्बानी, वो गुलामी की दर्द भरी कहानी,
कैसे थे वो बलिदानी?
खुद तो चले गए खुशियाँ हमको दे गए, ऐसा क़ीमती तो कुछ न हमसे ले गए।
कुछ न कर सके हम उनके लिए, जो सिर्फ आज़ादी के लिए थे जिए।
आज़ाद हिन्दुस्तान को क्या से क्या बना दिया,
संस्कृति,सभ्यता के नाम से सब दाँव पर लगा दिया।।
कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहाँ न हो घोटालों का राज,
हर तरफ फैल हुआ है हिंसा व सम्प्रदायवाद का साम्राज्य।।
उन बलिदानियों की आत्मा यह सब देख सिसकती होगी,
यह सोच सोच कर कितना वो बिलखती होगी,
क्या देकर आए थे क्या से क्या बना दिया,
हमारा दिया हुआ "भारत" सचमुच इन्होंने गवाँ दिया।।

नग़मा सिद्दीकी "नग़मा"
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