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मेरे अल्फाज़

जीवन धारा

Nagendra Dutt

71 कविताएं

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चल रहा है जीवन मेरा जैसे बहे जल की धारा
चंचल लहरों सा टकरा रहा है, नहीं कोई सहारा
फसी हुई है बीच भंवर में अपनी जीवन नौका
डोल रही है बिन मांझी के, ढूंढ़ रही कोई मौका
साँझ-सवेरे निकल चुके, नज़र न आया सहारा
चल रहा है जीवन मेरा जैसे बहे जल की धारा
न मिला कोई जीवन सागर में पार लगाने वाला
न दिखा साथी कोई यहाँ दुःख-सुख बाँटने वाला
जितने भी इस जग में देखे जालिम हैं वो यारां
चल रहा है जीवन मेरा जैसे बहे जल की धारा
-नागेन्द्र दत्त शर्मा


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