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मेरे अल्फाज़

मेघ प्रार्थना

Nag Mani

70 कविताएं

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मेघ प्रार्थना

मेघ तुम से प्रार्थना है ,
रूक जा पल दो पल यहीं संदेश मेरा ले जा,
विरहा मन गाता है मन ही मन गुनगुनाता है,
एकांकी मन के कोने से प्रियतमा की याद में,
रस की बरसात में बदली भरी रात में,
कालीदास के मेघदूत बहुँत याद आते हों,
सूत्रधार हो सहारा हो विरहा के गीत के,
मेघ तुम से प्रार्थना है,
वही चिरातन प्रश्र पहचान को चिन्ह दे,
मूढ़ युगों-युगों के दूत, वह वही विरहन,
झरोखें पे इठलाती हो शीतल बयार संग,
मानो हर झोंके में आलिंगन बधाँ हो,
बयारों के शीतल स्पर्श से कौंध - कौंध जाती,
विरहन झरोखे से लगी प्रतीक्षारत बयारों के
उच्छवास संग बदलते भाव भंगिमा,
मानो हर झोंके में आलिंगन बधाँ हो,
रंभा कामायनी शशि रति जो नाम दो
मेघ तुम से प्रार्थना है,
ले आना किसी उल्टी ब्यार में मेरा संदेश भी,
पूछते पुचकारते सहलाते संभारते
बयारों पे आते हर बूँद को अंजुरी में भर के,
अनभिज्ञ मैं
भीनी-भीनी सी सुगंध अलि के गुंजन संग,
आभासित करे मदमस्त यौवन का श्रृंगार,
मेघ तू जब लौटकर आयगा,
मैं दूरगामी दुर्दम्यगामी पथिक
पथों के उलझनों को सुलझाते सुलझाते,
कहीं अटक ही न जाऊ कहीं भटक ही न जाऊ
पथों का निर्माता मनु की संतान,
सौंदर्य यौवन के उन क्षणों को,
नयनों में संजोए,
दिवास्वप्न दृष्टा
मेघ तुम से प्रार्थना है

नाग मणि


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