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मेरे अल्फाज़

नदिया के पार

धीरज मिश्र

4 कविताएं

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नदिया पर बहती नावों को
तट से व्याकुल नैन निहारें
जीवन के मोड़े पन्नों को
आकर फिर दो हाथ सँवारें

लहरों से जुड़-जुड़कर जायें
या फिर वापस मुड़ कर जायें
नदिया पार खड़ा है कोई
सोच रहे हैं, उड़ कर जायें

मन के आवारा पंछी को
नदिया के सुर ताल पुकारें

चाहे जितनी तेज़ लहर हो
चाहे जितनी तेज़ भँवर हो
माँझी हैं निश्चिन्त नदी में
जैसे उनका अपना घर हो

गाते गाते गीत मिलन के
लहरों पर पतवारें मारे

जिसके बिन सब कुछ बिगड़ा है
जीवन कच्चा एक घड़ा है
खोज रहे हैं जिसे युगों से
वह नदिया के पार खड़ा है

साँझ हुई है माँझी आकर
हम को नदिया पार उतारें

- धीरज मिश्र
ग्राम/पोस्ट-दौलतपुर
थाना-सरेनी
तहसील-लालगंज
जिला- रायबरेली
पिन-२२९२०२
सम्पर्क सूत्र-९०२६३८४७७७, ८४२३११४५५५, ९५८०८०२३३३

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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