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मेरे अल्फाज़

सफाई मत दे

Munna Kumar

196 कविताएं

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मालूम है अच्छाई,
सफाई मत दो,
जानते हैं सब कुछ,
बयान मत दो।

लुका छिपी खेलों,
दिखाई मत दो,
मालूम हैं अच्छाई,
सफाई मत दो।

गलती में गहराई,
अंगड़ाई मत लो,
मालूम है अच्छाई,
सफाई मत दो।

अनमोल "मुन्ना" एकलव्य
ग्राम कटेया छपरा
सारण बिहार


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