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मेरे अल्फाज़

कुछ नया कर दिखाओ

Munna Kumar

95 कविताएं

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कब तक सोए रहोगे
कल्पना में खोए रहोगे

जातिवाद जुनून छोड़ोगे
तब तो कुछ करोगे

लोकतंत्र के दांव-पेंच में रहोगे
एक-दूसरे से लड़ मरोगे


अब उम्मीद जगाओ
कुछ नया कर दिखाओ।

अनमोल मुन्ना (एकलव्य)
ग्राम कटेया छपरा सारण बिहार

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