आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Astray

मेरे अल्फाज़

गुमराह

Mula Veereswara

5 कविताएं

28 Views
अंधेरी रात में,
अकेला ढूंढ रहा हूं
तेरी याद सहारा लेके ,
फिर वही तलाश
फिर वही आकाश
फिर वही खामोश
कभी ऐसा ना हो
मेरा राह
हो जाय
गुमराह !

- वीरेस्वरा राव
चित्रकूट, उत्तर प्रादेश

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!