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मेरे अल्फाज़

प्रभु तुम दयालु हो...

Mukesh Kumar

13 कविताएं

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प्रभु तुम दयालु हो...

तेरी महिमा, अनंत अपार,
शक्ति भी तुम हो, भक्ति भी तुम हो,
तुम ही हो, खेवनहार।।

आते भी तुम हो, जाते भी तुम हो,
भीतर में तुम हो, बाहर में तुम हो,
तुम ही हो, सृजनहार।।

धरती भी तुम हो, अम्बर भी तुम हो,
श्वांस में तुम हो, श्वासों की श्वास में तुम हो,
तेरी महिमा, अपरम्पार।।

दृष्टिगोचर भी तुम हो, उदयमान भी तुम हो,
जग में व्याप्त, समयमान भी तुम हो।
तुम ही हो, संसार।।

आकार भी तुम हो, निराकार भी तुम हो,
गुरु भी तुम हो, गोविंद भी तुम हो,
तुम ही हो, एक निर्विकार।।

प्रथम भी तुम हो, अंतिम भी तुम हो,
मंदिर में तुम हो, मस्जिद में तुम हो,
तुम ही हो, सरकार।।

कर्ता भी तुम हो, कारज भी तुम हो,
कण कण में, विद्यमान भी तुम ही हो,
तुम ही हो, आधार।।

ज्ञान भी तुम हो, विज्ञान भी तुम हो,
जीवों की आखिरी आस, भी तुम हो,
तुम ही हो, वो विश्वास।।

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

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