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मेरे अल्फाज़

खूब कमाया नाम सियासतदारों ने

Mujahid Beg

7 कविताएं

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कुछ चिंगारी दी मुल्की गद्दारों ने।
उस पर आग लगा दी कुछ अखबारों ने।

सिर्फ वही कहते हैं अब चैनल वाले।
हुक्म दिया उनको जितना सरकारों ने।।

कोई शहादत पाए कोई इतराए
खूब कमाया नाम सियासतदारों ने।।

गैर नज़र आए थे बस इक्का दुक्का।
ज्यादा बर्बादी की मेरे यारों ने।।

वो चारागर क्या बतलाता नासाज़ी।
जिसको राहत दी हो खुद बीमारों ने।।

खेत, चमन सब फसलों से महरूम हुए।
उनकी पदवी ले ली खरपतवारों ने।।

थर थर काँप उठे पीपल, आँगन, छप्पर।
आँख दिखाई जब इनको मीनारों ने।

आशाराम, रहीम खुदा कहते खुद को
उनको जेल करा दी इन अवतारों ने।

एम मिर्ज़ा

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