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स्त्री का संदेश..

                
                                                                                 
                            एक स्त्री का संघर्ष नित नवीन रहगुजर
                                                                                                

से होकर पथरीले पथ से गुजरता है

, ये बात अलग है कि इस संघर्ष की
परिभाषा सबके लिए अलग अलग हो
जाता है, कोई
पति के दिये, उपहार पाकर खुश है
तो कोई पुश्तैनी संपत्ति पाकर तुष्ट है,
लेकिन स्त्री जनित सम्मान समाज में हो
उसका ऊंचा स्थान, इस बात पर
नहीं है हर स्त्री संतुष्ट है।

स्त्री का संघर्ष स्वयं से जूझना है
स्वयं के आत्मबोध से परिचय होना है कि
वो सबला बनकर आत्मनिर्भर बने

आत्मनिर्भरता का अर्थ उसके सोच
और आमदनी की स्वतंत्रता है,
निर्णय लेने की क्षमता है,जो स्त्री

पति की चरित्रहीनता पर पर्दे डालती है
वो समाज में बढ़ते अपराध की कड़ी होती है,
और जो पुरूष स्त्री की चरित्र हीनता
स्वीकार कर जीता है
वो नर नहीं पशु समान है।
स्त्री की स्वतंत्रता उसकी मर्यादा की सीमा में हो
पुरूष की लोलुपता पर अंकुश की चाबुक हो
बेबाक और निर्भीकता की मार से
उसका अहंकार खंडित हो

एक स्त्री का संघर्ष इसी सोच से आरंभ हो

एक स्त्री का संघर्ष नित नवीन रहगुजर से
होकर पथरीले पथ से गुजरता है,

ये बात अलग है कि इस संघर्ष की
परिभाषा सबके लिए अलग अलग है।
भावना एक ही है स्त्री विचारों से आजाद
हो समिधा बनकर ही सही मगर सम्मानित हो।
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2 months ago

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