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मेरे अल्फाज़

आतंकी रोकथाम का रहस्य

monika kapoor

9 कविताएं

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जानना चाहेंगे कि कौन कर सकता है आतंकी रोकथाम,
जी हुजूर बस इस म्यान की तलवार है बस एक के नाम,
जननी हर शख्स की जिसको हम कहते मां समान।

यूं तो बहुत लघु है यह शब्द जनाब,
परन्तु इसमें ही समाया है सारा ब्रह्माणड।

इस जननी मां में है इतनी शक्ति भरी,
जो स्वयं ही सींचती एक जीव को हर घड़ी।

जो जननी इतनी सक्षम है जो जीवन दे दान,
तो विचारों कैसे पनपने दें सकती वह आतंकवाद का नाम।

अगर हर एक मां यह ले ले प्रण फौलादी,
कि अपनी औलाद को ना बनने देगी आतंकवादी।

तो ना कोई बनेगा, खिलजी,ना शेरशाह शाह सूरी,
बस अमन ही अमन होगा और चाल होगी सभी की नूरे नूरी।


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