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मेरे अल्फाज़

देश को अपने लाल लुटाए

Moni Gupta

19 कविताएं

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आज बहू की है पहली विदाई
और खबर एक अभी है आई
कोई बेटे का हाल बता रहा है,
तिरंगा में लिपटा वो घर आ रहा हैं
क्षण भर में उजड़ी दुनिया सारी
रूठ गयी घर से खुशियाँ सारी
माँ छुप छुप सबसे रोती है
छोटे बेटे से कहती हैं
दुश्मन न रहे अब मौज में
जा बेटा तू भी फ़ौज में
तेरी माँ की है सौगन्ध तुझे
इस माटी की सौगन्ध तुझे
दुश्मन को धूल चटाना है
तुझे माँ का कर्ज चुकाना हैं।
और साथ तिरंगा ले जाना,
न डरना तू न घबराना
लड़ते लड़ते गर थक जाना
ओढ़ तिरंगा सो जाना
फिर बहू से बोली ओ!!सोना
व्यर्थ है ये रोना धोना
भारत माँ को तेरी जरूरत है
ये भूल जा तू एक औरत हैं
ऊंची पहाड़ियां करके पार
करते गोलियों की बौछार
कर देना उसका छलनी सीना
तेरा सुहाग जिसने छीना
आंसुओं के दाम चुकाएगा
मैदान छोड़ वह जायेगा।
हैं धन्य धरा भारत भूमि
जहाँ जन्मी ऐसी माताये
आंच भी आई अपने देश पर
ख़ुशी से अपने लाल लुटाए।

रचनाकार
गीता गुप्ता "मन"
रायबरेली

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