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मेरे अल्फाज़

श्री विष्णु जी की याद में....

Mon Bhattacharya

219 कविताएं

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श्री विष्णु जी की याद में 
एक-एक कर ये सभी चले
महा-योगी बन सब कहाँ चले
ये चले जुगनूओं की तरह
उड़ते-उड़ते स्वर्ग की तरफ
स्वर्ग की सैर करने चले|

एक-एक कर ये सभी चले
महा-योगी बन सब कहाँ चले
हम सब के मन में दर्द दे के चले
प्रिय-बन्धन सारे तोड़ कर चले
एक दिन ये लौटेंगे स्वर्ग से
फिर धरा के इस आंगन में 

एक-एक कर ये सभी चले
महा-योगी बन सब कहाँ चले
विष्णु के दरवार में विष्णु चले
सबके अश्रु-पुष्प साथ ले,आसमानी पथ पे चले
व्यथित मन,हृदय टूटा,रोई आँखें सबके
देखो उनकी दूजी-आँख रूठी [चश्मा ]
घड़ी,पादुका व कलम रूठा|

एक-एक कर ये सभी चले
महा-योगी बन सब कहाँ चले
उनके वस्त्र रूठे,रूठी आराम-कुर्सी
सेज रूठे,मेज रूठे व माँ के घर की सीढ़ी
काव्य-शाला की छत सुनी पड़ गयी
सुनी हो गयी काव्य-महफ़िल की गद्दी
सुने-सुने सारे रह गए डायरी के बाकी पन्नें 

मन बावरी
श्रीमान विष्णु खरे जी को अश्रुपूर्ण विनम्र श्रद्धांजलि

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