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मेरे अल्फाज़

"आज उनके मन में प्यार जागा है "

Mon Bhattacharya

157 कविताएं

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आंसुओं से कह दो जरा ठहर कर देर-सबेर बहे
बसंती-हवाओं ने उनका पैगाम लाया हैं
कहते हैं छोड़ चुके सब नोक-झोंक
अब उनके मन में खैयाम जागा हैं
शहर में चलते-फिरते मजनूओं को देख
आज उनके मन में प्यार जागा हैं |

सुर्ख गुलाब की पंखुरियों से लिखते मेरा नाम हैं
ठंडी-प्याला चाय का अक्सर समझते ज़ाम हैं
ताजमहल को देख-देख सपना बुना करते हैं
एक मन का भवन बनाएंगे कहा करते हैं |
***************************"मन".[बावरी]

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