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badal do

मेरे अल्फाज़

बदल दो...

Mohd Adil

14 कविताएं

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अभी बदल दो आज बदल दो
सारे ताख-ओ-ताज बदल दो

जिनकी फितरत में उत्पीड़न
उनका गुण्डा राज बदल दो

औरत को जो जूती समझें--
वो रस्म-ओ-रिवाज़ बदल दो

शोषण जो सहते हैं हस कर--
ऐसा बुज़दिल समाज बदल दो

बहुत हुआ सम्मान ज़ुल्म का
अब अपनी आवाज़ बदल दो

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