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लालसा

                
                                                                                 
                            ना आह की कोई रिवाइश
                                                                                                

ना वाह की कोई ख़्वाहिश
निष्काम देव करू तेरी साधना
मेरे मन को रखना पवित्र
विचार रखना मेरे नेक
साहस से करना नही वंचित
सामाजिक दुख दर्द का मैं
वर्णन लिख सकूं बेबाक सचित्र
कलम बंधन में बंध सके
मुझे बनाना नहीं कमजोर
धन की तराजू तोले नहीं
बदले कभी नहीं मेरा चरित्र
मजबूर कर सके कोई नहीं
लालसाएं हो इतनी सीमित
गलती खुद की स्वीकार सकूं
मेरे दिल को रखना पवित्र
कपटियों का भय कभी ना हो
इरादे कभी मेरे हो नहीं दूषित
मेहरबानी हे दाता मोहन पर इतनी रहे
नई रचना तेरे चरणो मे करता रहूं अर्पित ।।

डाँ मोहन लाल अरोड़ा
 
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2 months ago

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