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मेरे अल्फाज़

परखा हुआ

Mnnang Rai

7 कविताएं

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आत्मज्ञान संकेतन होगा
जिवन विचार मिश्रण होगा

विचार जहाँ तक जायेगा
चरित्र बन जन झलकायेगा

भिड़ की चाल वही होगी
सार्वजनिक राह रही होगी

विरले अलग धारा मे पायेगा
असमानता रग रग लायेगा

पदचिह्न देख राह शोभित
जहाऩ उस पथ पर जायेगा

हर्ष नही , हश्र सब का एक आएगा
जन भाव नही, विभोर कैसे हो जाएगा

अडिग चरित्र नही , चित्रण जिसका होगा
अर्थ हिन बाते सब, भावार्थ किसका होगा

झूठ कह हितकर ठहरायेगा
सच तो विवादित बनता जायेगा

धुंधले तस्वीर पटल मे अंकित होगे
जब अपनो से कुछ पाने को सोचें होगे

मनंग

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