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मेरे अल्फाज़

कहानी आज़ादी की

Mitanshu Bisht

1 कविता

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आज़ादी की ये है कहानी
याद करे वीरों की क़ुर्बानी |
नहीं मिली आज़ादी आसानी से
मिली है ये क़ुर्बानी से
वो मां भारती के वीर है
वो देश की लकीर है
हम तो सारे फ़कीर है
वो देश की तक़दीर है
वो देश की शान है , वो इतने महान है
देश के लिए हंसते उन्होंने दे दी अपनी जान है
पूरे देश को उनसे उम्मीद है
कई अभी है बॉर्डर पर और कई हो गए शहीद है
किसी ने गोली खायी सीने पे और कोई फांसी पर लटक गया
कोई ऐसा था नहीं जो अपनी राह से भटक गया
कर्म उन्होंने ख़ुद किया पर फल हम सब को खिला गए
ख़ुद तो वो क़ुर्बान हो गए पर आज़ादी हम को दिला गए

मेरा देश को ये पैगाम है
आज का ये दिन भारत माता के नाम है
देश के शहीदों को पूरे देश प्रणाम है |


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