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मेरे अल्फाज़

ख़्वाबों का शोर

Minal Aggarwal

94 कविताएं

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ख़याल जब हकीक़त का रूप नहीं लेते
तो ख्वाब बहुत शोर मचाते हैं
रात भर सोने नहीं देते
बहुत रुलाते हैं
सुबह होने पर मायूस
औंधे मुंह एक कोने में पड़े होते हैं
सुबकते सुबकते
तकिये से लिपट
एक आशा की किरण आस में लिए
अपना हाथ अपने ही हाथ में पकड़
भारी दिल लिए
भरी भरी आँखें बंद किये
सो जाते हैं।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001

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