आपका शहर Close
Home ›   Kavya ›   Mere Alfaz ›   Apna na paraya

मेरे अल्फाज़

अपना न पराया

Minal Aggarwal

94 कविताएं

138 Views
जिसको जितना अपना समझा
वो उतना ही पराया निकला
उसने पर शायद कभी
मुझे अपना न पराया समझा।

मीनल
सुपुत्री श्री प्रमोद कुमार
इंडियन डाईकास्टिंग इंडस्ट्रीज
सासनी गेट, आगरा रोड
अलीगढ़ (उ.प्र.) - 202001

- हमें विश्वास है कि हमारे पाठक स्वरचित रचनाएं ही इस कॉलम के तहत प्रकाशित होने के लिए भेजते हैं। हमारे इस सम्मानित पाठक का भी दावा है कि यह रचना स्वरचित है। 

आपकी रचनात्मकता को अमर उजाला काव्य देगा नया मुक़ाम, रचना भेजने के लिए यहां क्लिक करें
सर्वाधिक पढ़े गए
Top
Your Story has been saved!