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मेरे अल्फाज़

प्रेम को स्वीकारना

Micku Nagar{Mukesh}

37 कविताएं

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सुनो ! तुम्हें पता है
तुम्हें सोचने मात्र से ही मैं खुश हो जाता हूं

तुम्हारी एक झलक मुझे सालों का
सुकून दे जाती है ।
इतनी दूरी होने के बावजूद मैं तुम्हे ,
अपने आस - पास महसूस करता हूं।

तुम्हारा साढ़े पांच घंटो में केवल
दो पल के लिए मुझसे मिलना ,ऐसा है जैसे
सदियों से गर्मी में तप्ति ज़मीन पर
दो बूंद बारिश मेहरबान हुई हो।

बन्द दरवाजे के पीछे वाला प्यार
मेरी समझ से परे है
मुझे तो मछली का पानी के प्रति प्रेम समझ आता है
उसे मृत्यु तो स्वीकार है
लेकिन पानी से दूरी बर्दाश्त नहीं।

प्रेम को स्वीकार करना
दुनिया की सबसे खूबसूरत अभिव्यक्ति है
हां मुझे प्रेम है तुमसे ,
मैं अपना प्रेम स्वीकार करता हूं।

------ मुकेश ------

झालावाड़ ,राजस्थान


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