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मेरे अल्फाज़

चाय पर मिले

Mesti Singh

15 कविताएं

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कहना जिन्दगी से चाय पर मिले।
हजार खुशियाँ हजार तौहफे जेब में छिपा कर मिले।।
कहना कल शाम को जिन्दगी से चाय पर मिले।

दिये हर गम के अपने, मरहम के साथ मिले
ताजा-तरीन हवा और मुसकुराते लम्हों के साथ मिले
कहना जिन्दगी से कल चाय पर मिले।।

हर बंदिशें हर खौफ को हटा कर मिले
आहिस्ता आहिस्ता से ढलते सूरज के साथ मिले।।
कहना एक बार जिन्दगी से चाय पर मिले।

दिये हैं जो जख्म अपने हाथों से आकर सिले।।
एक मासूमियत मेरे लिबास में मिले
कहना जिन्दगी से एक बार जरूर चाय पर मिले।।

- प्रिया सिंह

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