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मेरे अल्फाज़

काश

Meri Shayari

3 कविताएं

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काश मुझे ऎसा कोई चेहरा दिखाई दे...
इश्क़ जिसमें मुझको गहरा दिखायी दे...

जब भी गुरूर में उसको छोड़ना चाहूँ...
मेरे दरमियाँ मुझको पहरा दिखायी दे...

उसकी आँखों के कोई जवाब न हो...
उसके करीब बैठूं तो सेहरा दिखायी दे...

जिस तरह से हवा में फिल्मो में हैं उड़ते...
उसकी जु़ल्फें, दुपट्टा ऎसे लहरा दिखायी दे

उस मिलूं तो कुछ ऎसा मंजर पेश आये...
वो चलती रहे बस वक़्त ठहरा दिखायी दे...

उसके हाथों से मेरा नाम मिटाए ना मिटे...
मेहंदी का रंग इतना गहरा दिखायी दे...

©शाहरुख सैफी


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