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मेरे अल्फाज़

तहरीर

Meenakshi Raje

30 कविताएं

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मेरी तहरीर में अक्सर,
इक तस्वीर झलकती है,
उलझी कभी सुलझी सी,
जो कागज़ पे गिरती है,

कभी जो टूट जाऊँ मैं,
या खुद से रूठ जाऊँ मैं,
ये तहरीर ही अक्सर,
दवा का काम करती है,

ढलती रात में भी वो,
मेरे संग जाग जाती है,
मेरे नमकीन अश्कों में,
वो हँस के भीग जाती है,

मेरे जज़्बात के धागे में ,
वही लड़ियाँ लगाती है,
संग पन्ने के मिलकर वो,
अल्फ़ाज़ों को सजाती है,

-मीनाक्षी राजे

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