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मेरे अल्फाज़

मजबूर

ऋतु बाला

23 कविताएं

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मजबूर हैं राज दिल में छुपाने के लिए,
काबिल-ए-ऐतबार कोई दोस्त नहीं मिलता
हर कीमत देकर खरीद लें सुकून- ए- दिल,
अफसोस कोई फरोख्त ही नहीं करता

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