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मेरे अल्फाज़

मन को गर भर कर जिए...

Mayank Gupta

47 कविताएं

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मन को गर भर कर जिए,
तो मन भर न जी पाओगे,
पल पल हताशा में जी करके,
व्यर्थ ही जीवन अपना कर जाओगे।

अनिचित हर पल, हर तन ,हर मन
इनसे न तुम कुछ पाओगे,
कर भलाई इस जग में तुम,
बहु ऐश्वर्य कमाओगे
मन को ग़र.........।

चिंता, दुख और द्वेष में जी,
तुम चिंतन विमुख हो जाओगे,
ढो-ढो बोझ मन का सदा,
तुम पल-पल लाचार होते जाओगे
मन को गर.............।

मरण को सर्वदा सत्य मान,
जब जीवन का सत्य पहचानोगे,
तब लोभ, मोह सब विरत कर,
तुम जीवन अपना जी पाओगे।

मन को गर भर कर जिए,
तो मन भर न जी पाओगे।

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