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मेरे अल्फाज़

तेरे नयन गोटीयां

Mathur Nisha

3 कविताएं

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तेरे नयन गोटीयां

तेरे दो नयन चमकती गोटीयां,
हाय दिल पे काटे चिकोटीयां,
पलकें कटोरीयां पल पल खोलें
दिल की बैरंग बेनामी चिठिठयां!!


हाय तेरी अलकों की अठखेलियां
गोरे मुख पे करती हैं ठिठोलीयां,
घटायें चित्तेरी देख इत उत डोलें
चंदा बादल की छुपन छुपाइयां!!

तेरे अधर वो छलकती कटोरीयां,
मेरी सासों में घोलें यूं शोखियां
गुलाबों सी इनकी महक में डूबे,
खुद ही को भुलाती मदहोषियां!!

तेरी बतियां कितनी बचकानियां,
पग्गल सी करती हैं गुस्ताखियां,
बिजलियों सी खनके बोले कौंधे,
मुझ संग खेले आंख मिचैलियां!!

तेरे दो नयन चमकती गोटीयां
हाय दिल पे काटे चिकोटीयां!!

-----डा निशा माथुर


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