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मेरे अल्फाज़

हम कल से तेरी दीवारों पर लफ्जे मोहब्बत नही लिखेंगे

Maroof hasan

75 कविताएं

371 Views
इतिहास की कोई इबारत नही लिखेंगे
लफ्जों से सजी कोई नज्म़ नही लिखेंगे
तू घबरा नहीं बदनामी न होने देंगे तेरी
हम कल से तेरी दिवारों पर लफ्जे मोहब्बत नही लिखेंगे
मारुफ"आलम"


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