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मेरे अल्फाज़

जब अपने ही बच्चे देश के गद्दार हो जायेंगे

Maroof hasan

60 कविताएं

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हर तरफ नफरतों के बाजार हो जायेंगे
हर घर में सन्नाटा,मातम,मजार हो जायेंगे
गैरों से मुरव्वत की उम्मीद क्या रखें "आलम"
जब अपने ही बच्चे देश के गद्दार हो जायेंगे

मारुफ"आलम"





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