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Eternal love

मेरे अल्फाज़

श्याम की दीवानी

Manu Sweta

12 कविताएं

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कर घूंघट की ओट सखी री,
दीख न जाये साँवरिया।
मन ही मन चाहूं उनको,
हो गयी मैं बावरिया।
हर पल बस उनको सोचू
बजाऊँ प्रीत की बाँसुरिया।
तन मन उनको सौप चुकी मैं
बन गयी जैसे जोगनिया।
श्याम के रंग में रंगलू ऐसे
लोग कहे मुझे साँवरिया।

मनु श्वेता मुज़फ्फरनगर

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