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मेरे अल्फाज़

सीताएँ क्यों हरते हैं ?

Manoj Madhur

20 कविताएं

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हम याद खुदा को करते हैं।
वो याद न कर ले डरते हैं।।

ये डगर है लम्बी चौरासी,
फिर देर यहाँ क्यों करते हैं।

क्यों पेट काट कर अपनों का,
हम अपनी जेबें भरते हैं।

अपनी आँखों पर पर्दा है,
हर इन्सां को हम पढ़ते हैं।

नैसर्गिक सुंदरता असीम,
तसवीरों में रँग भरते हैं।

जब मन्दोदरी समर्पित है,
तब क्यों सीताएँ हरते हैं।।

@ मनोज मधुर,रूपबास,भरतपुर,राज०





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