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मेरे अल्फाज़

मैंने खोया ही क्या है

Manoj Madhur

72 कविताएं

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लुटा के सब कुछ,मिला प्यार तेरा,
तो सब कुछ लुटा कर, लुटा मेरा क्या है।
"मधुर" दिल में आती रहे याद तेरी,
तो खो कर तुझे,मैंने खोया ही क्या है।

 मनोज मधुर,रूपबास 


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