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मेरे अल्फाज़

सरस्वती वंदना

Manoj Kumar

8 कविताएं

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*दया करो माँ सरस्वती*

जिंदगी रुक सी गई
आंख भी झुक सी गई
सांसो की डोर टूट रही
उम्मीद सारी छूट रही
भर दे तू इनमे गति
दया करो माँ सरस्वती

अपने भी मुँह मोड़ के
चल दिये सब छोड़ के
ना किसी का साथ है
बस एक अंधेरी रात है
भर के सब मे सत् मति
दया करो माँ सरस्वती

मैं अकेला ही राह में
चल पड़ा इस चाह में
साथियो को वरदान दे
दुश्मनो को ज्ञान दे
पर ना हो कोई क्षति
दया करो माँ सरस्वती

वरदान दे परिवार को
परिवार बना संसार को
प्यार लूं और प्यार दूं
जीवन सब पर वार दूं
जला दे ज्ञान की बत्ती
दया करो माँ सरस्वती

- मनोज़ कुमार पुरोहित
अलीपुरद्वार (पश्चिम बंगाल)

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