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मेरे अल्फाज़

काश ! बचपन फिर लौट आता .....

Mankeshwar Kr

15 कविताएं

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बरसातों के वो मौसम , नावों के वो खेल ।
नदारद , धमाचौकड़ी और शरारत गीली डंडे के वो खेल ।।

काश ! मैं बच्चा होता...

सितों को वो लहरी आसमानों की वो चादर ।
रातों में वो तारों का गिनना सत भैया का दिखना होता ।।

काश ! मैं बच्चा होता ...

माँ की वो लोरी , ममता की वो आँचल ।
वो रातों को परियों की कहानी होती ।।

काश ! मैं बच्चा होता ...

आसमानों को छूने की वो चाहत , जमीनों को मापने की ख्वाईश ।
स्कूलों के वो हमसफर हमराही दोस्त ,कुछ करने की वो खुली उड़ान होता ।।

काश ! मैं बच्चा होता...

शुरू कर देता फिर एक बार हट अपनी ।
जहाजों की वो उड़ान चाहिए होना होता ।।

काश ! मैं बच्चा होता....

फिर गिनता एक दो और फिर भुल जाता ।
वही पुरानी बात फिर वही छड़ी लगती ।।

काश ! मैं बच्चा होता....

फिर वही टिफिन हुआ करती , फिर वही कबड्डी के खेल ।
फिर वही झगड़े , फिर वही मेल हुआ करती ।।

काश ! फिर वो बचपन लौट आता......

स्वरचित - मनकेश्वर महाराज "भट्ट"
रामपुर डेहरू , मधेपुरा ,बिहार


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