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मेरे अल्फाज़

मुक्तक

Manjull Manzar

18 कविताएं

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जब भोर सुहानी में देखूँ सूर्योदय वाला भारत हो
जब साँझ सलोनी में देखूँ चन्द्रोदय वाला भारत हो
मेरे मन की अभिलाषा है अंतिम साँसों तक मैं देखूँ
ये दीन दयाल के सपनों का अंत्योदय वाला भारत हो

- मंजुल मिश्र मंज़र

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