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मेरे अल्फाज़

कुछ कर जाना है

Manjit Chetry

65 कविताएं

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ज़िन्दगी में मुश्किलों से डर गए तो
ज़िन्दगी भर मुश्किलों से पिटोगे
एक बार सीख लिया मुश्किलों से लड़ना
तो ज़िन्दगी में हर खेल जीतोगे
ज़िन्दगी में हर खेल जीतोगे

मुश्किलों से जो डर गया
वो ज़िन्दगी में कूछ न कर पाएगा
जो लड़ गया हर मुश्किलों से
वो इंसान कूछ बड़ा कर जाएगा
कूछ बड़ा काम कर जाएगा

बिना संघर्ष किए यहां
किस को जीवन मिला है
क्या कसूर था गुलाब का
जो कांटों के बीच खिला है
गांधी कलाम हो या स्वामी
विवेकानंद सब को संघर्ष
के बाद ही कामयाबी मिली है
सबको संघर्ष के बाद कामयाबी मिली है

एक छोटी सी सुई दिन रात
न जाने कितने कपड़े सिलती है
मुश्किलों से हार न मानने वालों को
एक दिन कामयाबी जरूर मिलती है
एक दिन कामयाबी जरूर मिलती है

हमें मुश्किलों से डरना नहीं
मुश्किलों से लड़ जाना है
हम दुनिया से जाने के बाद भी
दुनिया याद करे हमें कुछ
ऐसा काम कर जाना है
हमें कुछ ऐसा काम कर जाना है


मंजीत छेत्री
तेज़पुर असम


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