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मेरे अल्फाज़

मेरा प्यारा वतन

Manjit Chetry

65 कविताएं

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लोगों की ज़िन्दगी बीत जाती है
एक घर बनाने में
लेकिन किसी को तरस क्यों नहीं आता
किसी का घर जलाने में
इंसान-इंसान का घर जला के
किस को क्या मिलेगा
मिल के रहो हिन्दू मुस्लिम
सब के घर में ख़ुशियां खिलेगी
सब के घर में ख़ुशियां खिलेगी
कोई हिन्दू को तो कोई मुस्लिम को
मारने की बात कर रहा है
किसी को ख़बर क्यों नहीं यहां
हिन्दुस्तान जल रहा है
यहां हिन्दुस्तान जल रहा है
कोई अपने मां बाप तो
कोई अपने भाई बहन खो रहा है
ख़ुदा तू ही बता मेरा प्यारा वतन में  
ये क्या हो रहा है
ना किसी को खाने की भूख
ना किसी को नींद आ रही है
लोग अपने रोजी रोटी छोड़
गांव जा रहा हैं
तू ही बता ऐ ख़ुदा इतने प्यारे
वतन में ये क्या हो रहा है
इंसान-इंसान का घर जला के
किसी को क्या मिलेगा
मिल के रहो हिन्दू मुस्लिम
सबके घर में ख़ुशियां खिलेगी
सबके घर में ख़ुशियां खिलेगी


मंजीत छेत्री
तेज़पुर असम


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