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मेरे अल्फाज़

मैं ही सचिन हूं

Manjit Chetry

65 कविताएं

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मैं ही सचिन हूं
पूरी दुनिया कहती है मुझे
मैं रन बनाने वाली मशीन हूं
मशीन का तो पता नहीं
लेकिन हां मैं ही सचिन हूं
कुछ करने बनने का सपना था
दिन रात खेल खेलना सीखता था
लेकिन मैदान में जब खेलता था
सब को मेरा जादू दिखता था
कुछ करने बनने के लिए इंसान
न जाने कितना कुछ खोता है
जादू भी कोई ऐसे नहीं होता उसके
पीछे जादूगर की मेहनत छुपी होती है
ज़िन्दगी में इंसान को कभी हार
नहीं माननी चाहिए
जिसने कुछ करने की ठानी है और
उसने हार नहीं मानी है
उन सब ने कामयाबी पाई है
इसलिए इंसान को कभी हार नहीं
माननी चाहिए
पूरी दुनिया कहती है मुझे
मैं रन बनाने वाली मशीन हूं
मशीन का तो पता नहीं
लेकिन हां मैं ही सचिन हूं
हां मैं ही सचिन हूं

मंजीत छेत्री
तेज़पुर असम


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