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मेरे अल्फाज़

फिर होली आ गयी

Manjit Chetry

65 कविताएं

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लाल गुलाब रंग से रंगी थी
तू मेरे दिल में छा गई
बहुत याद सता रही है सनम
आज फिर से होली आ गयी
हाथ में रंग गुलाल लिए
हम दोनों घूमते थे सारा जहां
नसीब ने खेल खेला कुछ ऐसा
आज तुम कहां हम कहां
तेरी याद मुझे आज फिर से
सता रही है
तू भी मुझे याद करती होगी
मेरा दिल बता रहा है
पहले तू मेरे हाथ में रंग गुलाल
देख मुझसे दूर भागती थी
एक बार रंग जाती मेरे हाथ से
तो फिर मेरे साथ खेलने आती थी
होकर लाल पीले हम दोनों
होली के रंग में खोजते
कितना मज़ा आता अगर आज भी
हम दोनों साथ हो जाते
हाथ में रंग गुलाल लिए हम दोनों
घूमते थे सारा जहां
नसीब ने खेल खेला कुछ ऐसा
आज तुम कहां हम कहां
लाल गुलाब रंग से रंगी थी
तू मेरे दिल में छा गई
बहुत याद सता रही है सनम
आज फिर से होली आ गयी
आज फिर से होली आ गयी


मंजीत छेत्री
तेज़पुर असम


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