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मेरे अल्फाज़

पलाश के फूल

Manisha Sharma

1 कविता

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अब तो पलाश के फूलों का गिरना भी बंद हो गया,
नीम और आम के बौरों का साथ मिलकर, महकना भी बंद हो गया,
बस चला ही गया है बसंत संग लेकर महकती हवाओं को,
अब "लूओं" को बसंती हवा कहना भी बंद हो गयाΙ

पलाश के पेड़ों से अब फूल नहीं रूई झड़ती है,
आम और नीम से कच्ची अम्बियाँ और निम्बोली गिरती हैं,
सूख गया रस मौसम का गर्मियों के आने से,
अब हवा को दुलार नहीं दुत्कारें मिलती हैंI
 
-मनीषा शर्मा

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