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मेरे अल्फाज़

परमात्मा का अंश हूँ मैं जीवंत आत्मा हूँ

Manish Kumar

1 कविता

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परआत्मा का अंश हूँ मैं जीवंत आत्मा हूँ
दिल से कहूँ,
या अपने लहू से लिखूं,
प्यार कहूँ,
या भक्ति कहूँ,
जो भी हो
मेरी आराधना हो तुम,
जिसकी पूजा करता हूँ,
वो भगवान हो तुम,

मुझे जिनकी आज सबसे ज्यादा जरूरत है आज वही लोग मेरे साथ नहीं है.
लेकिन मुझे ख़ुशी इस बात की है
कि तुम और तुम्हारा प्यार आज भी मेरे साथ है.
दिल से कहूँ,
रगों में दौड़ते हुई
प्यार कि लहर हो तुम
जो हमेशा
निराशा में मुझे
नई ताकत देती हो उठने की
दौड़ने की
फिर मंजिल को पाने की
खुले आसमान पर
अपना नाम लिख जाने की

जीवन में बहुत सी गलतियाँ हुई है
क्योंकि प्यार ही इतना है

आज किसी संस्थान का मोहताज़ नहीं
सिर्फ अपनी बंदिशो का गुलाम हूँ

दौड़ता गिरता
गिरकर संभालता खुद को
पकड़ता, फिर संभलता हूँ

जिन्हें मुझ पर विश्वास है
मैं उनका भी हूँ
जिन्हें नहीं
उनका भी हूँ

मैं पानी में घुल जाने वाला रंग हूँ
हवा में लहराने वाली पतंग हूँ
मैं सूर्य की तरह तेज हूँ
तरंग हूँ
अजनबी दुनिया का
अलग ढंग हूँ

मैं ईश्वर नहीं
तो मानव भी नहीं
पशु की दहाड़
पक्षियों की चहचहाहट हूँ

मैं तुम हूँ
तुम मैं हो
मैं आसमान का तारा
तुम चमकता चाँद हो

जो कल है
वो आज है
जो आज है
वो भटका हुआ कल है

न दिन है न रात है
भागती हुई दुनिया में
किसकी क्या बिसात है
जो रोक दे चलती पवन को
नीर में बह जाने को
कौन तैयार है
तू धूल है रेगिस्तान की
पर्वत की तू चट्टान है

तू सब है
तू आत्मा है
तू परमात्मा का एक अंश है

- मनीष कुमार भंभानी

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