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My poetry

मेरे अल्फाज़

मेरी कविता

Manish Kumar

10 कविताएं

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खलबली है मची चारो ओर,
कौन जीतेगा सत्ता की ये दौड़,
दो कदम से किसी की कुर्सी है छूटी जा रही है,
कोई गठजोड़ के ताकत को अपनीं शक्ति है बना रही,

कोई पैसे की ताकत है दिखा रहा,
कोई सियासत से पाँव है जमा रहा,
लगी है सब ओर राजनीति की होड़,
खलबली है मची चारो ओर,

कोई बगैर फल के पेड़ है गिन रहा,
कोई अमावस से पूनम को है जोड़ रहा,
तीर-कमान की गजब की है ये दौड़,
खलबली है मची चारो ओर,

जो करती है बेड़ा पार,
उसनें हीं फँसा दिया है बीच मंझधार,
बगैर आवाज के मच रहा है शोर,
खलबली है मची चारो ओर,

खलबली है मची चारो ओर

मनीष पटना

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