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Complaint

मेरे अल्फाज़

शिकायत

Manish Kumar

1 कविता

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यहां इक दर्द सीने में तुम्हारे बाद रहता है
तुम्हारी बेवफाई पर ये दिल नाशाद रहता है

शिकायत बेवफाई का खुदा से कर तो दें लेकिन
तुम्हारे बाद अब कोई खुदा क्या याद रहता है

कोई तो पूछ कर उससे मुझे इतना बता देना
क्या मेरी बेकरारी जान कर वो शाद रहता है

कोई तो फलसफा मुझको बता दो इस खुमारी का
क्या अक्सर इश्क़ में ये दिल यहां बर्बाद रहता है

सुनाये किसको हाले दिल यहां अब इस ज़माने में
कभी जिसको सुनाते थे वो अब आज़ाद रहता है

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