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मेरे अल्फाज़

दरिंदगी-एक व्यथा

Manas Raj

1 कविता

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एक नन्हीं परी, नाजो से पली
एक दरिंदे की उस पर नजर पड़ी

झपटा वो उसपे जैसे काँटों की छड़ी
उलझ गई बेचारी नव कौंपकली

चीर डाली उसने कच्ची अनार की कली
रह गई उसकी साँसें थमी की थमी

वो नन्हीं सी प्यारी सी आँखों की तारी लली
वो वहसी दरिंदे की भेंट चढ़ी

एक नन्हीं परी, नाजो से पली

लेखक- मानस राज सिंह

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